दिग्विजय सिंह कांग्रेस के ऐसे नेता हैं जो लोकपाल बिल पर
सरकार की चिंताओं को मीडिया में व्यक्त करते रहते हैं।
भ्रष्टाचार की गंगोत्री हिंदुस्तान मैं कांग्रेस के शासनकाल में
ही जन्मी और परवान चढ़ी। जिस कांग्रेस ने इतने सालों में
भ्रष्टाचार को कभी चुनावी मुद्दा बनाया ही नहीं, उससे ये उम्मीद
करना कि वह लोकपाल बिल के माध्यम से इस पर अंकुश
लगाएगी ... व्यर्थ है। अन्ना हजारे एवं उनके सहयोगी अगर
अपनी चिंताएं जाहिर कर रहें हैं कि सरकार लोकपाल बिल के ज़रिये
भ्रष्टाचार उन्मूलन के प्रति गंभीर नहीं है तो वो ठीक ही कह रहें हैं.
Tuesday, June 7, 2011
Friday, March 11, 2011
हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकलेडरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन परवो खून जो चश्म-ऐ-तर से उम्र भर यूं दम-ब-दम निकले निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिनबहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकलेभ्रम खुल जाये जालीम तेरे कामत कि दराजी काअगर इस तुर्रा-ए-पुरपेच-ओ-खम का पेच-ओ-खम निकले मगर लिखवाये कोई उसको खत तो हमसे लिखवायेहुई सुबह और घर से कान पर रखकर कलम निकले हुई इस दौर में मनसूब मुझसे बादा-आशामीफिर आया वो जमाना जो जहाँ से जाम-ए-जम निकलेहुई जिनसे तव्वको खस्तगी की दाद पाने कीवो हमसे भी ज्यादा खस्ता-ए-तेग-ए-सितम निकलेमुहब्बत में नहीं है फ़र्क जीने और मरने काउसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकलेजरा कर जोर सिने पर कि तीर-ऐ-पुरसितम निकलेजो वो निकले तो दिल निकले, जो दिल निकले तो दम निकले खुदा के बासते पर्दा ना काबे से उठा जालिमकहीं ऐसा न हो याँ भी वही काफिर सनम निकलेकहाँ मयखाने का दरवाजा 'गालिब' और कहाँ वाइज़पर इतना जानते हैं, कल वो जाता था के हम निकले
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