तुम्हे बिन पाए खोने से डरता हूँ
मै तुमेह बेपनाह इश्क करता हूँ
दिल की हकीकत कैसे करू बयाँ
तेरे खफा हो जाने से डरता हूँ
खोया रेहता तेरे खयालो में
भीड़ में भी तेरा ही चेहरा ढून्ढ ता हूँ
दिल की हकीकत कैसे करू बयाँ
तेरे खफा हो जाने से डरता हूँ
हर शय में दिखता है तेरा ही चेहरा
हर आह्टमें तेरी आमद सी लगती
देख तेरे नजरो की मयकशी
मैं होश खोने से डरता हूँ
दिल की हकीकत कैसे करूँ बयाँ
तेरे खफा हो जाने से डरता हूँ
चाहत चकोर सा है दिल में
पर फजर से डरता हूँ
हकीकत क्या है तेरे दिल की,रवि
ये जानने को मैं तड़पता हूँ
दिल की हकीकत कैसे करू बयाँ
तेरे खफा हो जाने से डरता हूँ
रवि राज
Friday, July 9, 2010
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